PM मोदी ने किया स्वर्वेद मंदिर का उद्घाटन, जानें-वाराणसी में बना दुनिया के सबसे बड़ा ध्यान केंद्र क्यों खास?

Swarved Mahamandir Dham : वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आज स्वर्वेद महामंदिर धाम का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने मंदिर की दीवारों पर उकेरी अद्भुत नक्काशी देखने के बाद कहा कि इस मंदिर की दिव्यता जितना आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमें उतना ही अचंभित भी करती है। मंदिर के लोकार्पण के बाद पीएम मोदी ने संत सदाफल महाराज की 135 फीट ऊंची प्रतिमा का शिलान्यास भी किया।

बता दें कि विहंगम योग संस्थान के प्रणेता संत सदाफल महाराज की ओर से स्वर्वेद महामंदिर का निर्माण कराया गया है। स्वर्वेद मंदिर के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। उमरहा स्थित स्वर्वेद महामंदिर करीब 19 साल में बनकर तैयार हुआ है और 7 मंजिला मंदिर के बनने में 100 करोड़ रुपए की लागत आई है।

जानें-स्वर्वेद महामंदिर की क्या है खासियत?

  1. उमरहा स्थित स्वर्वेद महामंदिर 64 हजार वर्ग फीट में फैला हुआ है और सात मंजिला है।
  2. इस मंदिर को बनाने में 20 साल का वक्त लगा और 100 करोड़ रुपए की लागत आई।
  3. इस मंदिर की ऊंचाई 180 फीट है और इस मंदिर में मकराना मार्बल का इस्तेमाल किया गया है।
  4. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर एक साथ 20 हजार लोग योग और ध्यान कर सकते हैं। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर में से एक है।
  5. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां भगवान की नहीं बल्कि योग साधना की पूजा होती है।
  6. इस मंदिर की खासियत है कि इसमें कमरे बने हुए नहीं हैं।
  7. स्वर्वेद मंदिर की डिजाइन 9 कमल पर आधारित हैं। यह स्वर्वेद के सिद्धांत के अनुसार हैं। इसमें बड़े कमल में 125 पत्तियां हैं।
  8. स्वर्वेद महामंदिर को हाइटेक लाइट्स से सजाया गया है।
  9. मंदिर के अंदर 3137 स्वर्वेद के दोहे दीवारों पर लिखे हैं। यह स्वर्वेद ग्रंथ के मुताबिक ही हैं।
  10. कैंपस में 100 फीट ऊंची सद्गुरुदेव की प्रतिमा स्थापित होगी।

जानें-क्यों बनाया गया है ये मंदिर?

स्वर्वेद मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है स्व: और वेद। स्व: का एक अर्थ है आत्मा और वेद का अर्थ है ज्ञान। स्व: का दूसरा अर्थ है परमात्मा और वेद का दूसरा अर्थ है ज्ञान। जिसके द्वारा आत्मा का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, जिसके द्वारा स्वयं का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, उसे ही स्वर्वेद कहते हैं।

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इस मंदिर में भगवान की नहीं बल्कि योग साधना की पूजा होती है यानी मेडिटेशन किया जाता है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा मेडिटेशन सेंटर बनाया गया है, जिसमें बैठकर एक साथ 20 हजार लोग योग और ध्यान कर सकते हैं। मंदिर की दीवारों पर करीब चार हजार स्वर्वेद के दोहे लिखे हैं और बाहरी दीवार पर 138 प्रसंग वेद उपनिषद, महाभारत, रामायण, गीता आदि के प्रसंग पर चित्र बनाए गए हैं।

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