मिट्टी का बना मेरयू लेकर निकले बच्चे, घर-घर जाकर लगाई मेरयू की पुकार, महिलाओं ने तेल और भेंट दी

सागवाड़ा/दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के दूसरे दिन सोमवार सुबह होते ही बच्चे मेरयू करने निकल पड़े। बच्चों ने हाथों में मिट्टी से बने मेरयू लेकर घर-घर घूमे और मेरयू की पुकार लगाई। घर की महिलाओं ने बच्चों के मेरयू में तेल के साथ ही भेंट दी। इससे बच्चे खुश नजर आए। वहीं, बड़े लोगों ने एक दूसरे को दिवाली और नए साल की शुभकामनाएं दी।

दिवाली का त्योहार जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। डूंगरपुर समेत पूरे वागड़ में लक्ष्मी पूजन के दूसरे दिन तड़के मेरयू की परंपरा निभाई गई। सुबह दिन खुलने से पहले ही महिलाओं ने अपने घर की साफ सफाई करने के बाद घरों के बाहर दिए जलाए। वहीं, बच्चे इकट्ठे होकर आइसक्रिम आकर के मिट्टी से बने मेरयू लेकर दिया जलाकर निकल गए। बच्चे घर घर पहुंचे और चोखट पर जाकर आज दिवारी काल दिवारी परमे दाड़े घेर दिवारी….. मेरयू की… पुकार लगाई। घर की महिलाओं ने बच्चों के मेरयू दिए में थोड़ा तेल और पैसे डाले। शहर से लेकर हर गांव और गली मोहल्ले में बच्चों के मेरयू की पुकार सुनाई दी।

वहीं, शादी के बाद पहली दिवाली वाले नए दुल्हा और दुल्हन के भी मेरयू की परंपरा हुई। सुबह उठकर दुलहन नहा धोकर श्रृंगार कर तैयार होकर आती है। गांव की महिलाएं मंगल गीत गाती हैं। दुल्हा अपने दोस्ती, गांव के बच्चों और युवाओं के साथ मिलकर मेरयू की पुकार लगाई। दुल्हन पहले दूल्हे और फिर दूसरे युवाओं के मेरयू में तेल और भेंट दी जाती है। वहीं, बच्चों की ओर से जमकर आतिशबाजी भी की गई। इसे लेकर बच्चों और युवाओं में जमकर उत्साह देखा गया।

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