मंदिर प्रतिष्ठा के तहत निकली शोभायात्रा

सागवाड़ा। मंगलम विहार में मंगलेश्वर महादेव मंदिर प्रतिष्ठा के तहत शनिवार को विधि विधान से पूजन हुआ। प्रतिष्ठाचार्य किशोर त्रिवेदी के आचार्यत्व में स्थापित मंडप याग देव पूजन के साथ अग्नि स्थापना, सहग्रहमख ग्रहशांति के साथ विशाल गंगाजल कलश यात्रा निकाली गई। वही मूर्तियों का धान्याधीवास, प्रासाद स्तपन, अष्ट दिक्षु होम विशेष राजोपचार शिव महापूजा के साथ रुद्र स्वाहाकार एवम शतचंडी अनुष्ठान प्रारंभ हुआ।

प्रतिष्ठाचार्य किशोर त्रिवेदी ने बताया कि प्रासाद का स्तपन 108 प्रकार की विभिन्न औषधियों व 17 प्रकार के विभिन्न फलों के रसो से अभिषेक किया गया। उन्होंने प्रतिष्ठा के अर्थ को बताते हुए कहा कि प्रतिष्ठा यानी ईश्वरत्व को स्थापित करना है। जब भी कोई स्थापना होती है, तो उसके साथ मंत्रों का जाप होता है, अनुष्ठान तथा अन्य प्रक्रियाएं होती हैं। अगर आप किसी आकार की स्थापना या प्रतिष्ठा मंत्रों के माध्यम से कर रहे हों, तो आपको उसे निरंतर बनाए रखना होगा। भारत में, पारंपरिक रूप से, हमें यह बताया जाता है कि घर में पत्थर की प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि आपको उचित प्रकार की पूजा और अनुष्ठान के साथ उसे प्रतिदिन पूजना होगा। अगर किसी देव प्रतिमा की स्थापना मंत्रोच्चार के साथ हो और प्रतिदिन उनकी पूजा न हो, तो इस तरह यह ऊर्जा को सोखने लगती है और आसपास रहने वालों को भारी हानि हो सकती है। दुर्भाग्यवश बहुत से मंदिर ऐसे ही हो गए हैं क्योंकि वहाँ उचित प्रकार से रख-रखाव नहीं किया जाता। लोग उन मंदिरों को जीवित रखना नहीं जानते।

प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान ऐसा नहीं होता। जीवन ऊर्जाओं के बल पर, एक आकार की प्रतिष्ठा या स्थापना की जाती है, उसे मंत्रों या अनुष्ठानों से जाग्रत नहीं किया जाता। जब यह एक बार स्थापित हो जाए, तो यह हमेशा के लिए रहता है, इसे किसी रख-रखाव की आवश्यकता नहीं पड़ती। यही कारण है कि ध्यानलिंग में पूजा नहीं की जाती क्योंकि इसे उसकी ज़रूरत ही नहीं है। मंदिर के अनुष्ठान आपके लिए नहीं, बल्कि देवता को जाग्रत रखने के लिए होते हैं। अन्यथा, वे धीरे-धीरे मृतप्राय हो जाते हैं। ध्यानलिंग को ऐसे रख-रखाव की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इसे प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया गया है, और यह हमेशा ऐसा रहेगा। भले ही आप लिंग का पत्थर वाला हिस्सा हटा दें, यह फिर भी वैसा ही रहेगा। अगर सारी दुनिया का भी अंत हो जाए, तो भी यह वैसा ही रहेगा।

आप इसे नष्ट नहीं कर सकते। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आचार्य कुंड से अग्नि लाकर समस्त प्रतिष्ठा कुंड में यज्ञ की कार्यवाही की साथ ही कीर्ति स्तम्भ के यजमान हेमन्त भावसार के परिवार द्वारा पूजा की गई। प्रधान कुंड के यजमान तेजप्रकाश जोशी द्वारा यज्ञ की आहुति के साथ विधिवत आहुतियां दी गयी मुख्य आचार्य किशोर त्रिवेदी, सतीश, रामेश के मंत्रोच्चार से पूजा और आहुतियाा शुरू की। आज कलश यात्रा की शोभायात्रा भी मंगलम विहार से वडियो का डूंगरा तक निकली गयी उक्त कलश यात्रा बैंडबाजे पर समस्त महिला पुरुषों के नाचते हुए भााग लिया। जिसमे भोपॉलसिंह, परेश शर्मा, प्रशान्त जोशी, जयन्त भावसार, राजेश पवार, युवराजसिंह, लोकेश भटेवरा, आशीष शर्मा, लोकेश उपाध्याय, नरेश शुक्ला, महिला वर्ग में सुमन, राजेश्वरी, मीना देवी, माधुरी, विद्यादेवी, आशाबाई, ज्योत्स्ना देवी, रमिला देवी सहित कई नागरिक मौजूद रहे।

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