रेगिस्तान में अनोखी बिल्डिंग, बीकानेर के सीलवा गांव में बना पदम स्मारक, हर हिस्से में सूरज की रोशनी

बीकानेर : बीकानेर से 70 किलोमीटर दूर नोखा गांव। यहां से गुजर रहे नेशनल हाईवे से सिलवा गांव में गुलाबी रंग की बिल्डिंग दिखती है। बिल्डिंग का नाम है पदम स्मारक। रेतीले धोरों के बीच बनी इस बिल्डिंग का डिजाइन बेहद खास है। स्मारक और इसमें लगे पत्थरों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सुबह से लेकर शाम तक यहां लाइट की जरूरत नहीं होती।

सबसे खास यहां की डिजिटल लाइब्रेरी है। इस हाईटेक लाइब्रेरी में एक क्लिक पर टेबल से कम्प्यूटर निकलता है। यहां कॉम्पिटिशन की तैयारी करने वाले बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाती है। हमारी मीडिया टीम वहां पहुंची तो दावा किया गया इसे स्विट्जरलैंड के ग्रीन हाउस की तर्ज पर डिजाइन किया है।

पदम स्मारक नोखा गांव, बीकानेर

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इस स्मारक की खासियत जानने से पहले जानें इसे तैयार किसने किया…

पिता की याद में तीन बेटों ने तैयार कराई, यहां पिता के संघर्ष की कहानी

नोखा के पदमा राम कुलरिया लकड़ी के काम से जुड़े होने के साथ गायों की सेवा भी करते थे। कुछ साल पहले उनका देवलोकगमन हो गया था। तीन बेटों कानाराम-शंकर-धर्मचंद कुलरिया ने उनकी याद को बनाए रखने के लिए ऐसे कैम्पस को तैयार करने की सोची, जिसमें उनके पिता के संघर्ष की झलक हो। साथ ही बच्चों को फ्री एजुकेशन मिल सके।

पदम स्मारक नोखा गांव, बीकानेर

सुबह-शाम लाइट और हवा की जरूरत नहीं
स्मारक की लाइब्रेरी से लेकर म्यूजियम में सीधे सूरज की रोशनी आती है। आप कहीं पर भी खड़े हो जाएं सूरज की रोशनी सीधे उस एरिया में देखने को मिल जाएगी।

दावा किया जाता है कि यहां सुब​ह और शाम ट्यूबलाइट या बिजली की जरूरत नहीं है। हालांकि, हवा के लिए पूरे कैम्पस को सेंट्रल एयर कंडीशन से भी जोड़ा गया है।

लाइब्रेरी के चारों ओर बनी दीवार पर जोधपुरी पत्थर से बनी जालियां हैं, जिनमें से धूप सीधे यहां की लाइब्रेरी में पड़ती है। अंदर की तरफ दीवार के पास कांच की लेयर लगाई है, जो अंधड़ में मिट्‌टी अंदर आने से रोकती है।

फ्री हाई स्पीड इंटरनेट भी मिलता है
भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो 10 से 15 स्टूडेंट थे। इनमें से कोई UPSC की तैयारी करने वाला था, तो कोई किसी दूसरी प्रतियोगी परीक्षा की।

यहां 10 कम्प्यूटर लगे हुए हैं। टेबल पर एक स्विच लगा हुआ है। इस स्विच पर जैसे ही उंगली रखते हैं, टेबल से मॉनिटर बाहर आता है। इस मॉनिटर को स्टूडेंट अपनी हाइट के अनुसार एडजस्ट भी कर सकता है।

इसके साथ यहां कॉम्पिटिशन और दूसरी परी​क्षाओं की तैयारी करने आने वाले स्टूडेंट को फ्री हाई स्पीड इंटरनेट भी मिलता है।

पदम स्मारक नोखा गांव, बीकानेर

देश और दुनिया के टॉप लेक्चरर, मोटिवेशनल गुरु, कॉम्पिटिशन क्लासेज देने वाले टीचर्स के वीडियो एक क्लिक पर मिल जाते हैं। यहां स्टूडेंट से किसी तरह की कोई फीस नहीं ली जाती है।

इसके अलावा किसी को अलग से किसी एक्सपर्ट या टीचर का लेक्चर चाहिए और वे स्टाफ को बता देते हैं तो उसकी भी सुविधा स्टूडेंट को आसानी से मिल जाती है।

1 हजार किताबें यहां की लाइब्रेरी में, कोई एंट्री फीस नहीं
यहां की लाइब्रेरी में करीब 1 हजार किताबें हैं, जिनमें साहित्य, धार्मिक ग्रंथ और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की किताबें शामिल हैं। इसके अलावा भी किसी अन्य किताब की डिमांड स्टूडेंट्स की तरफ से आती है तो मंगवाकर दी जाती है।

UPSC की तैयारी कर रहे युवक ने बताया कि जो सुविधा बड़े शहरों में नहीं है, वो पदम पैलेस में है और वो भी पूरी तरह निशुल्क। इसके भूतल (कन्याकुमारी) में स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम की तर्ज पर प्रार्थना कक्ष बनाया जा रहा है।

दावा : बरसात की एक बूंद भी यहां वेस्ट नहीं जाएगी

ये पूरा एरिया रेगिस्तानी इलाके में है। यहां पानी का भी बड़ा संकट रहता है। इसलिए इस बिल्डिंग में बरसात की एक-एक बूंद को सहजने के लिए प्लान बनाया गया है। ​

बिल्डिंग में अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक बनाया गया है, जिसमें 7 लाख लीटर बारिश का पानी स्टोर किया जा सकता है। बिल्डिंग के टॉप और आस-पास में छोटे-छोटे नाले बनाए गए हैं। इसके साथ चारों तरफ एक स्ट्रक्चर बनाया गया है, जिसका पानी एक छोटे से स्टोरेज में आता है और यहां से पाइप के जरिए अंडरग्राउंड टैंक तक पहुंचता है।

जमीन से 55 फीट ऊपर बनाने के लिए डाली गई 27 हजार ट्रॉली मिट्टी
इस इमारत को जमीन से 55 फीट ऊंचा बनाया गया है। इसके लिए 27 हजार ट्रॉली मिट्टी डाली गई है।

पदम ग्रुप के कारीगरों ने स्मारक में पिंक स्टोन पर मशीनों व हाथों से नक्काशी की है। इसे बनाने में करीब दो से ढाई साल का समय लगा। इसके लिए प्रतिदिन करीब 100 मजदूर काम करते थे। स्मारक की डिजाइन पदम ग्रुप एवं आर्किटेक्ट संजय पुरी के द्वारा तैयार की गई है।

14 टन मार्बल से तैयार की पिता की प्रतिमा
इस स्मारक में संत पदमाराम कुलरिया की प्रतिमा के साथ 5000 स्क्वायर फीट में ऐम्फी थियेटर बनाया गया है। यहां सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम हो सकेंगे। प्रतिमा में 14 टन मार्बल लगा है। इनके साथ उनके गो सेवा को दर्शाती हुई 8 फीट ऊंची गाय की प्रतिमा भी लगी है। स्मारक परिसर में 16 बाई 16 साइज का पूजा स्मारक भी बनाया गया है, जहां सुबह-शाम भजन कीर्तन होंगे।

डिजिटल म्यूजियम, बाहर से आने वाले टूरिस्ट भी रुक सकेंगे
स्मारक परिसर में म्यूजियम बनाया गया है। म्यूजियम की दीवारों पर तीनों बेटों ने अपने पिता के जीवन वृत्तांत को दर्शाया है। इसमें सामान्य श्रमिक से संत बनने तक के सफर को दिखाया है। म्यूजियम में फोटो प्रदर्शनी के साथ डिजिटल वॉल है।

इसके साथ ही बाहर से आने वाले टूरिस्ट के लिए भी काफी सुविधाएं हैं। कैंटीन के साथ चेंजिग रूम, सिक्योरिटी रूम, किचन और दो बेडरूम वाले कमरे भी हैं। इसी परिसर में 5 बीघा एरिया में 9 हजार स्क्वायर फीट की पार्किंग रखी गई है और 10 हजार स्क्वायर फीट ओपन एरिया है।

संचालन के लिए अलग से टीम
कुलरिया परिवार ने इस पदम स्मारक की देखभाल और यहां की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए पूरी टीम बनाई है। यहां पांच कर्मचारी 24×7 घंटे ड्यूटी देते हैं। दूर-दूर से आने वाले स्टूडेंट्स और यूथ की आवश्यकताओं के मुताबिक डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा दूर से आने वाले स्कूल्स के स्टूडेंट्स को रिफ्रेशमेंट दिया जाता है। एक कैफेटेरिया भी बनाया गया है, जहां स्टूडेंट्स चाय-नाश्ता कर सकते हैं।

जल्द बनेगा डिजिटल स्कूल
इसी परिसर के पास कुलरिया परिवार की ओर से एक स्कूल का निर्माण करवाया जा रहा है। ये स्कूल पूरी तरह से डिजिटल होगा। पढ़ाई के लिए कम्प्यूटर, इंटरैक्टिव बोर्ड सहित अन्य सुविधाएं होंगी। इसके लिए हाल ही में भूमि पूजन किया गया है और अब भवन का निर्माण शुरू होने जा रहा है। बताया रहा है कि अगले सेशन से ये शुरू हो जाएगा। दावा ये भी किया जा रहा है कि ये राजस्थान में अब तक का सबसे हाईटेक और बेहतर सुविधाओं वाला डिजिटल स्कूल होगा।

 

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