डूंगरपुर जिले की 4 विधानसभा सीट पर 41 उम्मीदवार मैदान में, बागी बनेंगे कांग्रेस के लिए मुसीबत, बीजेपी को भी भीतरघात का खतरा

डूंगरपुर/विधानसभा चुनावों के नामांकन के बाद प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गई है। विधानसभा चुनावों का नामांकन पूरा होने पर डूंगरपुर जिले की 4 विधानसभा सीटों पर 41 उम्मीदवारों ने नामांकन भरे हैं। चौरासी में सबसे अधिक 12, डूंगरपुर और सागवाड़ा में 11-11 और आसपुर में सबसे कम 7 नामांकन आए हैं। इसमें से कुछ प्रत्याशियों ने 2 और कुछ ने डमी कैंडिडेट के रूप में पर्चा भरा है। ऐसे में 9 नवंबर को नामांकन जांच और वापसी के बाद ही अंतिम स्थिति क्लियर होगी। डूंगरपुर, सागवाड़ा और चौरासी में पंचकोणीय और आसपुर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।

चौरासी विधानसभा सीट

चौरासी विधानसभा सीट पर इस बार पंचकोणिय मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा से पूर्व राज्यमंत्री सुशील कटारा मैदान में हैं। कांग्रेस से पूर्व सांसद और पूर्व जिला प्रमुख ताराचंद भगोरा हैं। चौरासी विधानसभा सीट पर मौजूदा बीटीपी अब नई पार्टी बनी बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) के राजकुमार रोत विधायक हैं, लेकिन इस बार आदिवासी समाज को लेकर समान विचारधारा रखने वाली बीटीपी और बीएपी दोनों ही पार्टियां मैदान में हैं। ऐसे में बीएपी से प्रत्याशी राजकुमार रोत की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। चौरासी में भाजपा एकजुट है। कांग्रेस ने पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा पर भरोसा जताया, लेकिन उनकी मुश्किलें कांग्रेस से बागी महेंद्र बरजोड़ ने बढ़ा दी हैं। बरजोड़ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भी हैं। कांग्रेस से ताराचंद भगोरा के पुत्र महेंद्र भगोरा ने भी डमी कैंडिडेट के रूप में फॉर्म भरा है। बीटीपी से बात करें तो रणछोड़ ताबियाड भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। सपा के उदय कुमार घोघरा, इंडियन पीपुल्स ग्रीन पार्टी के शंकरलाल बामणिया, बीएसपी के विजयपाल, आम आदमी पार्टी से शंकरलाल आमलिया मैदान में हैं। आप पार्टी से शंकरलाल की पत्नी हर्षा ने डमी कैंडिडेट के रूप में फॉर्म भरा है।

डूंगरपुर विधानसभा सीट

डूंगरपुर सीट पर भाजपा, कांग्रेस, बीएपी, बीटीपी के साथ ही कांग्रेस से बागी हुए निर्दलीय प्रत्याशी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। डूंगरपुर सीट पर 11 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों से बागी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। भाजपा ने डूंगरपुर सीट पर नर्सिंग ऑफिसर बंशीलाल कटारा को मैदान में उतारा है। टिकट वितरण के समय भाजपा के दूसरे दावेदारों में नाराजगी और विरोध जताया, लेकिन समझाकर ये विरोध थम गया। भाजपा से बागी होकर पूर्व सरपंच और पंचायत समिति सदस्य कमलेश मनात ने निर्दलीय के रूप में नामांकन भरा है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक गणेश घोघरा प्रत्याशी है। जबकि टिकट नहीं मिलने से नाराज दूसरे दावेदारों के समर्थन से बिछीवाड़ा प्रधान देवराम रोत ने बागी निर्दलीय नामांकन भर दिया है। देवराम रोत के समर्थन में कांग्रेस के पूर्व एमएलए लालशंकर घाटियां सहित डूंगरपुर से पूर्व प्रधान लक्ष्मण कोटेड सहित कांग्रेस के कई नेता और सरपंच समर्थन में हैं। ऐसे में बागी निर्दलीय देवराम रोत कांग्रेस का गणित बिगाड़ेंगे। गणेश घोघरा की पत्नी जमना देवी घोघरा ने भी कांग्रेस से डमी कैंडिडेट के रूप में फॉर्म भरा है। बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) से कांतिलाल रोत प्रत्याशी हैं। वे डूंगरपुर बांसवाड़ा लोकसभा सीट पर बीटीपी से प्रत्याशी रहे थे, लेकिन हार गए थे। इस बार विधानसभा में प्रत्याशी घोषित होने के बाद बीएपी से दूसरे दावेदार अनुतोश रोत सहित उनके समर्थक नाराज हैं। बीटीपी से डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनिक डॉ. दीपक घोघरा मैदान में हैं। बीटीपी से अलग होकर ही बीएपी बनी है। ऐसे में दोनों की विचारधारा एक है। बीटीपी और बीएपी के वोट बैंक में बिखराव आएगा। डॉ. दीपक घोघरा ने 2 नामांकन भरे हैं। भारत की कम्यूनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी से गोतमलाल डामोर प्रत्याशी हैं। गौतमलाल वकील है और किसान, मजदूर और एसएफआई जैसे स्टूडेंट आंदोलन की पैरवी करते हैं। ऐसे में उनकी बिछीवाड़ा क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। आप से देवेंद्र कटारा प्रत्याशी हैं। देवेंद्र कटारा पूर्व में भाजपा से विधायक भी रह चुके हैं। वे भी कॉमरेड विचारधारा से भाजपा में आकर विधायक बने थे, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से टिकट नहीं मिला तो बागी चुनाव मैदान में थे। जिस पर भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया, लेकिन इसके बाद वे बीटीपी और फिर आम आदमी पार्टी में चले गए थे। अभिनव लोकतंत्र पार्टी से विजया देवी परमार और बीएसपी से जीवनलाल नगजी मैदान में हैं।

आसपुर में त्रिकोणीय मुकाबला

विधानसभा क्षेत्र आसपुर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा से 2 बार के विधायक गोपीचंद मीणा तीसरी बार फिर से प्रत्याशी हैं। यहां भाजपा में एकजुटता दिख रही है। कांग्रेस ने नए युवा चेहरे के रूप में 3 बार से कहारी सरपंच राकेश रोत को मैदान में उतारा है। राकेश रोत को टिकट देने के बाद कांग्रेस के दूसरे दावेदारों ने नाराजगी जताते हुए कांग्रेस एसटी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सूरमाल परमार ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी, लेकिन बाद में कांग्रेस नेताओं के समझाने पर वे मान गए। ऐसे में कांग्रेस भी अब एकजुट दिख रही है। राकेश ने 2 नामांकन भरे हैं। बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) ने पिछली बार बीटीपी से प्रत्याशी रहे उमेश डामोर को मैदान में उतारा है, जबकि बीटीपी ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। आम आदमी पार्टी से मुकेश कुमार को टिकट दिया गया है। निर्दलीय में 2 फॉर्म भरे गए हैं। मुकेश और कमला उमेश मीणा ने निर्दलीय के रूप में फॉर्म भरे हैं।

सागवाड़ा विधानसभा सीट

सागवाड़ा विधानसभा सीट पर पंचकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। कांग्रेस से बागी उम्मीदवार भी कड़ी टक्कर देंगे। यहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा बीएपी और बीटीपी के बीच टक्कर होगी। भाजपा ने पूर्व प्रधान शंकर डेचा को दूसरी बार प्रत्याशी बनाया है। पिछली बार वे भाजपा से बागी प्रत्याशी के उतरने से चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार सागवाड़ा सीट पर भाजपा एकजुट दिख रही है। कांग्रेस ने इस बार 2 बार के सरपंच रहे युवा चेहरे कैलाश रोत को टिकट दिया है। कैलाश को टिकट मिलने के बाद कांग्रेस के दूसरे दावेदार विरोध में उतर गए थे। कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री भीखा भाई के परिवार का टिकट काट दिया है। वहीं कांग्रेस से ही बागी होकर सरोदा के सरपंच पन्नालाल डोडियार ने निर्दलीय के रूप में 2 नामांकन भरे हैं। उन्हें पूर्व मंत्री भीखा भाई के परिवार सहित कई कांग्रेस नेताओं का समर्थन मिला है। बीएपी (भारत आदिवासी पार्टी) से यहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत को टिकट दिया है। पूर्व में बीटीपी से विधायक बने रामप्रसाद डिंडोर का टिकट काटा गया है। बीटीपी ने इस सीट पर पार्टी के राज्य सचिव मोहनलाल डिंडोर को मैदान में उतारा है। इसके अलावा आप पार्टी से शिवलाल बदिया, निर्दलीय गोवर्धन ननोमा, देवीलाल अहारी, मानसिंग रोत ने नामांकन किया है। बीएसपी से अमृतलाल अहारी भी मैदान में है।

कांग्रेस में बागी बिगाड़ेंगे खेल

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किलें बागियों ने खड़ी कर दी है। जिले के 4 में से 3 सीटों पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों ने नामांकन भर दिए हैं। इससे कांग्रेस को दूसरी पार्टियों के साथ अपने बागी प्रत्याशियों से भी कड़ी चुनौती मिलेगी। डूंगरपुर से कांग्रेस के बागी बिछीवाड़ा प्रधान देवराम रोत, चौरासी विधानसभा सीट पर पीसीसी के महासचिव महेंद्र बरजोड़ ने निर्दलीय फॉर्म भरा है, जबकि सागवाड़ा विधानसभा सीट पर सरोदा से सरपंच पन्नालाल डोडियार ने कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय ताल ढोक दी है। ऐसे में कांग्रेस को बागियों से पार पाना होगा। डूंगरपुर भाजपा की बात करें तो डूंगरपुर सीट पर भीतरघात का डर है। बंशीलाल को टिकट मिलने के बाद पूर्व जिला प्रमुख सहित कई दूसरे दावेदार विरोध में उतर गए थे, हालाकि समझाने के बाद वे पार्टी के साथ हैं।

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